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कबीर – आ. हजारी प्रसाद द्विवेदी (पूरी किताब)

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ये गरीबी में जनमते थे, गरीबी में ही पलते थे और उसी में ही मर जाया करते थे। ऐसे कुल में पैदा हुए व्यक्ति के लिये कल्पित ऊंच-नीच भावना और जाति व्यवस्था का फौलादी ढांचा तर्क और बहस की वस्तु नहीं होती, जीवन-मरण का प्रश्न होता है। कबीरदास इसी समाज के रत्न थे।

Kabir – Achary Hajari Prasad Dvivedi Ki Kaljayi Kriti




  1. Kedar NathKedar Nath09-06-2013

    बहुत ही उत्तम गुणवत्ता की पाठन सामग्री ..विचारशील लेखन…हार्दिक शुभकामनाएं

  2. nirmal sahewallanirmal sahewalla09-08-2015

    Want to read this book, heard a lot

  3. KARNI DAN PARAKHKARNI DAN PARAKH09-22-2015

    how I can get this book pl.guide me

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