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Author Archive for: ‘Rajiv Kumar’

बिबिया – एक अन्तःपाठ

बिबिया पितृसत्तात्मक-समाज-व्यवस्था द्वारा दिए गए ‘स्पेस’ में ही अपने स्वाभिमान की लड़ाई लड़ती है। बिबिया का चरित्र एक तरफ ‘त्रिया चरित्र’ के कांसेप्ट पर चोट करता है तो दूसरी तरफ आधुनिक स्त्री विमर्श से भी जुड़ता है। त्रिया चरित्र का कांसेप्ट व्यभिचारी पुरुष को भी यह सर्वसुलभ अधिकार देता है कि वह किसी भी स्त्री के चरित्र पर सवाल खड़ा कर सकता है और स्त्री को सामाजिक-बहिष्कार का दंश दे सकता है।

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