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Monthly Archive for: ‘April, 2013’

रुसी क्रांति का दर्पण : लियो तॉलस्तॉय – लेनिन

एक तरफ – सामाजिक झूठों और ढोंगों का अत्यंत मजबूत, सीधा और सच्चा विरोध है। दूसरी तरफ तॉलस्तॉयवादी अर्थात निष्प्राण, पागलपन की सीमा तक पहुंचा हुआ, गरीबी के नारे लगाने वाला रूसी बुद्धिजीवी है जो कि आम लोगों के सामने अपनी छाती पीट-पीट कर कहता है ‘‘मैं बुरा हूं, मैं गंदा हूं, परंतु मैं नैतिक आत्मशुद्धि के लिये यत्नशील हूं; अब मैं गोश्त नहीं खाता, अब मैं चावल के कटलेट ही खाकर रह जाता हूं।’’

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बलात्कार – जर्मेन ग्रीयर

अगर शारीरिक हिंसा महिलाओं के लिये अत्यधिक भयावह नहीं होती, तो अधिकांश बलात्कार कभी होते ही नहीं। अगर आप किसी पुरुष का लिंग अपने शरीर में इसलिए प्रविष्ट होने देते हैं क्योंकि वह आपकी नाक काट देगा तो निश्चित तौर पर आप अपनी नाक का कटना कहीं अधिक बुरा मानते हैं; लेकिन मूर्खतापूर्ण कानून आपकी राय से इत्तेफाक नहीं रखता। आपकी नाक काटने की सजा बलात्कार की सजा से कम ही होगी, लेकिन तब आप पर यह संदेह नहीं किया जा सकेगा कि आप अपनी नाक काटे जाने पर सहमत थीं।

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