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Author Archive for: ‘Digvijay Kumar Singh’

बुद्धिजीवियों का निर्माण – अंतोनियो ग्राम्शी

कहा जा सकता है कि सभी मनुष्य बुद्धिजीवी होते हैं, हालांकि सभी समाज में बुद्धिजीवी की भूमिका नहीं निभाते। जब हम बुद्धिजीवियों और गैर-बुद्धिजीवियों के बीच फर्क करते हैं तो असल में हम बुद्धिजीवियों की पेशेवर श्रेणी की प्राथमिक सामाजिक भूमिका को चिन्हित कर रहे होते हैं, यानी हमारा ध्यान इस बात पर होता है कि उनकी विशेष पेशेवर गतिविधि की दिशा किस ओर है, बौद्धिक व्याख्या की ओर या मांसपेशीय गतिविधियों की ओर।

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हॉब्सबॉम हमारे लिए

पूंजीवादी विश्वव्यवस्था पर उनका लेखन मार्क्सवादी विचारों की बेहतरीन अभिव्यक्ति है, पूर्व-पूंजीवाद से पूंजीवादी समाज में मनुष्यता के दर्द भरे संक्रमण का बेहतरीन आख्यान। उनका लेखन सिद्धांत के साथ व्यवहार का ऐसा सधा हुआ तालमेल है जिसमें इतिहास की बात करते हुए आख्यान भी साथ-साथ तैयार होता चलता है। इतिहास का विषय भले ही अतीत हो लेकिन उसकी वास्तविक चिंता तो हमारे वर्तमान से जुड़ी है और हॉब्सबॉम को पढ़ते हुए आप लगातार अपने वर्तमान को समझते चलते हैं।

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